राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष टिप्पणी

राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष टिप्पणी

राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष टिप्पणी

राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष टिप्पणी

स्वामी जी का छोटा सा जीवन परिचय मैं उनके इस प्रसिद्ध कथन से कर रहा हूँ |

“‘उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक

लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।”   By Swami Vivekananda

जन्म : 12 January 1863 ( कोलकाता)

बचपन का नाम : नरेंद्र नाथ दत्त

गुरु : रामकृष्ण परमहंस

पुस्तक : मैं समाजवादी हूँ

मृत्यु : 4 July 1902 (बेलूर)

स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। महाराज खेतड़ी के सुझाव पर इन्होने विवेकानंद नाम ग्रहण किया था. उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 11 Sep 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। वहाँ के मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू का नाम दिया.

भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द के कारण ही पहुँचा। उन्होंने 1897 रामकृष्ण मिशन की स्थापना की. उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत “मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों” के साथ करने के लिये जाना जाता है।उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।

उन्होंने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड और रूढ़ियों की खिल्ली भी उड़ायी और लगभग आक्रमणकारी

भाषा में ऐसी विसंगतियों के खिलाफ युद्ध भी किया।

इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी जी के कथन : जब तक देश में लाखों लोग,  भूखे  तथा अज्ञानी हैं, मैं ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को देशद्रोही समझूंगा जिन्होंने उनकी मेहनत की कमाई से शिक्षा प्राप्त की पर उनकी परवाह नहीं करते |

मैं ऐसे ईश्वर को नहीं मानता जो विधवाओं के आंसू पोंछ सके,या किसी अनाथ को रोटी का एक टुकड़ा भी दे सके |

उन्तालीस वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी विवेकानन्द जो काम कर गये वे आने वाली अनेक शताब्दियों

तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

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